*संस्कृत सर्वजनभाषा हो- राज्यपाल भगतसिंग कोश्यारी*

*कविकुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत महोत्सव का संस्कृतानुरागियों के उपस्थिती मे भव्य उद्घाटन*
रामटेक विशेष प्रतिनिधि
रामटेक – कविकुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के विस्तार सेवा मंडल द्वारा आयोजित संस्कृत महोत्सव का उद्घाटन सोमवार दिनांक 3 ऑगस्ट 2020 को जिओ मीट प्लॅटफॉर्मपर संपन्न हुआ.संस्कृत महोत्सव के उद्घाटन समारोहके उद्घाटक महाराष्ट्र के राज्यपाल तथा विश्वविद्यालय के कुलपति भगतसिंग कोश्यारी उपस्थित थे. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल, महाराष्ट्र के उच्च व तंत्रशिक्षण मंत्री उदय सामंत प्रमुख अतिथी के रूप मे उपस्थित थे. सारस्वत अतिथी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के पूर्व कुलपती प्रोफेसर व्ही कुटुंब शास्त्री,संभाषण संदेश के संपादक डॉ.जनार्दन हेगडे,विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेडी,कुलसचिव विजयकुमार,जिओ मीट के बाला अय्यर, विस्तार सेवा मंडल निदेशक कृष्णकुमार पांडे,राज्य समन्वयक डॉक्टर प्रसाद गोखले, महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयोंके कुलगुरू, विश्वविद्यालय के सर्व अधिष्ठाता ,संवैधानिक अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित थे. कार्यक्रम का प्रारंभ वैदिक मंत्रघोष से हुआ. स्वागत भाषण संस्कृत महोत्सव के समन्वयक कृष्णकुमार पांडे ने किया. कार्यक्रम का प्रास्ताविक कुलगुरू श्रीनिवास वरखेडी ने किया. प्रास्ताविक मे वरखेडी ने कहा विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस महोत्सव का उद्देश संपूर्ण महाराष्ट्र,भारत की विविध संस्थाए,विश्वविद्यालय तथा संस्कृति प्रेमियो को जोडणे और संस्कृत कार्यक्रमोंके माध्यम से संस्कृत विषयक सामाजिक जागरण करना है. इस महोत्सव के माध्यम से 250 संस्था संलग्न थी.

*सारस्वत अतिथी प्रोफेसर कुटुंब शास्त्रीने अपने भाषण मे कहा* संस्कृत भाषा सनातन भाषा है.आधुनिक ज्ञान विज्ञान के प्रवाह मे संस्कृत को प्रबलता से लाना चाहिये.उत्तराखंड राज्य ने संस्कृत भाषा को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया है.इसी प्रकार सभी राज्योंने संस्कृत भाषा को मुख्य प्रवाहमे स्थान देना चाहिये.कविकुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम वैशिष्टपूर्ण है. कुलगुरू वरखेडी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय उत्तम प्रगती कर रहा है. संस्कृत सेवा सन्मान प्रदान करने हेतु मै विश्वविद्यालय का आभारी हुं.
*उच्च व तंत्र शिक्षण मंत्री उदय सामंत ने कहा* संस्कृत भाषा मातृभूत है.उसका सम्मान महाराष्ट्र मे किया जायेगा. छत्रपती शिवाजी महाराज व संभाजी महाराज ने भी संस्कृत भाषा का महत्व जाणा था. उसका स्मरण करके ही मैने मेरे भाषण का प्रारंभ संस्कृत मे किया. संस्कृत महोत्सव का निमंत्रण मुझे देने हेतु मै विश्वविद्यालय का आभारी हुं. महाराष्ट्र सरकार संस्कृत विश्वविद्यालय के सभी योजनांओं को आनंद पूर्वक सहहयोग देगा. गत चार साल से स्थगित महाकवी कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार की प्रक्रिया है जल्द ही शुरू करूँगा.मै महाराष्ट्र के सभी संस्कृत विद्वान को प्रार्थना करना चाहता हुं की, आपका मार्गदर्शन शासन को दीजिए तथा छात्रो और समाज तक यह पहुंचाने के लिये प्रयासरत रहीये.

इस कार्यक्रम मे उपस्थित सभी महानुभावोंकी उपस्थिती मे संस्कृत भारती द्वारा विरचित संस्कृती विज्ञानम् प्रदर्शनी का लोकार्पण किया गया. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री पोखरियाल ने कहा संस्कृत केवल भाषा नही अपितु ज्ञान,विज्ञान,अनुसंधान, और नवाचार की भाषा है.भारत का मूल्यविचार संस्कृत मे निहीत है.विविध शास्त्र संस्कृत मे है. भारतीय योग शास्त्र को आंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है. संपूर्ण जगत मे संस्कृत का अध्ययन-अध्यापन शुरू है. नई शिक्षा नीति मे संस्कृत का यह वैशिष्ट्यपूर्ण स्थान समझकर संस्कृत को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है.संस्कृत महोत्सव आयोजित करणे के लिये मै संस्कृत विश्वविद्यालय को संस्कृतानुरागीयों को बधाई और शुभकामनाये देता हु.

इस अवसर पर *राज्यपाल भगतसिंग कोश्यारी* ने कहा विश्वविद्यालय ने आयोजित किये ईस महोत्सव का उद्घाटन संपन्न हुआ इसकी मे घोषणा करता हु. तथा इस महोत्सव को शुभकामना देता हु.भारतीय साहित्य में महाकवी कालिदास का स्थान एव्हरेस्ट जैसा है. संस्कृत का केवल भाषाज्ञान होना ही काफी नही है.उसके विविध शास्त्रोंका ज्ञान भी आत्मसात करना चाहिए. भारतीय संस्कृती संस्कृताश्रित है. संस्कृत भाषा अध्ययन से व्यक्तिमत्व का सर्वांगीण विकास होता है. भाषा,संस्कार,विचार,संस्कृती, कला,विज्ञान,शास्त्र ईत्यादी का भंडार संस्कृत भाषा है.उसका अध्ययन तथा संशोधन होना चाहिये संस्कृत यह सर्वजन भाषा होनी चाहिये.ईस भाषा के माध्यम से विकास,प्रचार-प्रसार के लिए एक नीती अपनानी चाहिये. संस्कृत यह नित्यनूतन भाषा है. इस भाषा का वैविध्य तथा गंभीरता समझणा आवश्यक है. संस्कृत भारतीय संस्था संस्कृत संभाषण का प्रशिक्षण दे रही है संभाषण के बिना भाषा का अस्तित्व नही है. इसलिये संस्कृत अध्ययन,संभाषण को हमे जीवन व्रत लेना चाहिये ऐसा आवाहन राज्यपाल ने किया.
कार्यक्रम का संचालन वेदांग ज्योतिष विभागप्रमुख डॉक्टर दिनकर मराठे और डॉक्टर रेणुका बोकारे ने किया. सन्मानपत्र वाचन विस्तार सेवा मंडल के राज्य समन्वयक डॉक्टर प्रसाद गोखले ने किया. कुलसचिव प्रोफेसर विजयकुमारने धन्यवाद वितरण किया. प्राची जांभेकर द्वारा पसायदान कार्यक्रम की समाप्ती हुई. जिओ मीट के माध्यम से संपन्न हुये संस्कृत महोत्सव मे भारत की 250 से अधिक संस्थाएं तथा दस हजार से अधिक संस्कृत प्रेमी उपस्थित थे. विशेषतः संपूर्ण महाराष्ट्र के विभिन्न विद्यालयोंके संलग्नित महाविद्यालयों के छात्र गण, प्राध्यापक,प्राचार्य,पत्रकार, विश्वविद्यालय सदस्य उपस्थित थे.संस्कृत महोत्सव मे डॉक्टर जनार्दन हेगडे संपादक संभाषण संदेश,दिनेश कामत संस्कृत भारती,श्रीश देवपुजारी अखिल भारतीय संघटनमंत्री संस्कृत भारती,मुकुल कानिटकर अखिल भारतीय संघटन मंत्री भारतीय शिक्षा मंडल,विविध विश्वविद्यालयों के कुलगुरू सर्वश्री सुहास पेडणेकर,शशिकला वंजारी,मृणालिनी फडणवीस, प्रमोद येवले,अशोक धवण, आशिष पातुरकर आदी उपस्थित थे.
उद्घाटन समारोह के अनंतरगीत मेघदूतम् यह महाकवी कालिदास के मेघदूतम खंडकाव्य पर आधारित विशिष्ट श्लोकों का आस्वादन पर निरुपम तथा गायन प्राची जांबेकर उपसचिव राजभवन और धनश्री शेजवलकर संशोधन छात्रा तिलक महाराष्ट्र विद्यापीठ पुणे इन्होने सुंदर प्रस्तुत किया.रामगिरी से अलका नगरी ऐसा मेघ रमणिय प्रकृती के साक्षी से हुआ प्रवास उन्होने प्रत्ययकारी वर्णनोंद्वारा तथा विभिन्न रागो में रचीत मधुर श्लोकगायन द्वारा जीवित किया. इस कार्यक्रम का संगीत डॉक्टर केशव चैतन्य कुंटे इनका था.तथा संवादिनी साथ पुनम पंडित ने की. इस कार्यक्रम की संकल्पना और निवेदन प्राची जांभेकर का था इस प्रस्तुती को रसिकश्रोताओं से वाहवा प्राप्त हुयी.
Maharashtra News Media सच की आवाज