*कन्हान नदीके घाट “सब गोलमाल है भाई”*
*राजस्व विभाग सावनेर के लचर कार्यप्रणाली और “तेरी भी चुप” चलते रोजाना लाखो चपत*
मुख्य संपादक – किशोर ढुंढेले
सावनेरः सावनेर तहसील अंतर्गत खापा पो.स्टे.हद्द मे बहनेवाली कन्हान नदीके रेतीघाटोपर अवैध तरहसे हो रहे उत्खनन से एक ओर जहा राज्य शासन का करोडो का राजस्व डुब रहा है वही स्थानिक पोलीस, राजस्व और स्थानिक नेताओ के वरदहस्तीसे अनेक छुटभैय्ये इस व्यवसाय मे लिप्त होकर लाखो लाखकी माया काट रहे है.
*रेतीघाटो की निलामी नही फीर भी उत्खनन*
कन्हान नदीके लगभग सभी रेतीघाटो की निलामी अभीतक हुयी नही और कोरोना महामारी के चलते हाल फीलहाल इन घाटो की निलामी होनेके आसार भी दिखाई नही देते.एक और जहा रेतीघाटोकी निलामी नही फीरभी इन घाटोसे रोजाना हजारो ट्रक बेखौफ तरहसे तहसील के राजस्व विभाग,पोलीस प्रशासन के नाकोतलेसे रेत की चोरी होना दुनिये के आठवे अजुबेसे कम नजर नही आता.
*अपनी तो निकाल पडी़…!*
*सर्व विदीत है की सावनेर के तत्कालीन तहसीलदार दिपक कारंडे का हाल फीलहाल आननफानन मे तबादला होना.अपने उपर हुये अन्यायपुर्वक तबादले के विरोध मे “मँट” न्यायालयमे जाना. नयेसे आये तहसीलदार प्रताप वाघमारे को क्षेत्र तथा उक्त रेतीघाटो की ओर देखने की फुर्सत नमिलने का उचित लाभ उनके अधिनस्थ राजस्व विभागके अधिकारी कर्मचारी,महिला नायब तहसीलदार, मंडल अधिकारी, पटवारी और उनके चेलेचापटो की तो निकल पडी.सुत्रोकी माने तो ना सुबह ना रात ना कीसी का डर सीर्फ वसुली अभियान पर जोर अगर खुँद जबाबदार अधिकारी इस तरह से बेखौफ माल काटते रहे तो न्याय कहा और कैसे मीलेंगा*
*घाटोसे रेत उठाने के नये नये फंडे*
*कन्हान नदीके रेती घाटो परसे रेत उठाने के नित नये फंडे इजात कीये जाते रहे है.फीलहाल पीछले माह हुयी भारी बारीश और कन्हान नदिको आये बाढ मे संपूर्ण खापा परिसर जलमग्न हो गया था.जिसके चलते बाढ के चपेट मे कन्हान नदीसे सटे खेत बाढ का पाणी मे समा गये थे उक्त बाढ के पाणीके साथ बहके आई मीट्टी और रेत सेकडो खेतोमे आजानेसे किसानो की फसलो का बडा नुकसान हुआ और खेतो मे आई रेत निकलवाने के नाम पर फीरसे तहसील और जिल्हाधिकारी कार्यालय की इजाजत की जुगत लगाकर कुछ रेतीघाटो के ठेकेदार खेतो मे पडी रेत न उठाते सीधे नदीसे रेत उठा रहे जिससे शासन को करोडो का नुकसान उठाना पड रहा है.*