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*गुरु की वापस आयी आँख ,पढ़ने लगा पेपर*

*गुरु की वापस आयी आँख ,पढ़ने लगा पेपर*

खपरखेड़ा –  मुख्य बाजार पेठ मे हमाली करके पेट भरने वाला गुरु नाम का हमाल ,रात मे व्यापारियों के दुकान के ही सेड मे अपना बसेरा करता था ,गुरु का परिवार गुरु को नही संभालते था, अपना जीवन खुद हमली करके चलाता था ।
लेकिन करोंना मे उसकी आंखों मोतिया बिंदु होने से उसकी आंखों से कुछ नही दिखता , जिससे वह बेसहारा हो गया, कुछ भी काम नहीं कर सकता था ऐसे समय वार्ड नंबर दो के जैन गली के तीन दुकान के व्यपारी सामने आए ,बाबा ढोमने ,बंटी बतरा, उमेश घाटबांधे इन तीनों व्यापारीयो ने करोना काल मे दुकानें तो बंद रहती थी ऐसे समय इन तीनों व्यापारियों ने तीन महीने प्रतिदिन उसको संभाला उसकी रोज की क्रिया स्नान करवाना, खाना खिलाना, कपड़े बदलना उसको साफ सफाई करके खाना खिलाना। लेकिन उसके आंख के ऑपरेशन के लिए सरकारी अस्पताल में ले जाने के बाद उसका ऑपरेशन नहीं हो राह क्यो की सरकारी अस्पतालों में आंखो के ऑपरेशन बंद कर दिए थे ऐसे समय इन व्यापारियों ने पैसे जमा करके पहले करोना टेस्ट करके निजी अस्पताल में उसका ऑपरेशन करके उसकी आंखें वापस लायी, व्यापारियों मे खुशी आयी, गुरु व्यपारी दुकान जाकर पेपर पढ़ने लगा औऱ फिर से हमली करने लगा , व्यापारियों गुरु को देखकर उनको खुशी के आंसू आए.

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