*वरोरा में एमआईएम द्वारा आयोजित छत्रपति शिवाजी महाराज जयंति को लोगों ने सराहा!*
*वरोरा एमआईएम शाखा द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती कार्यक्रम को लोगों ने बड़ी उपस्तिथि दर्शाकर प्रोत्साहन दिया!*
वरोरा प्रतिनिधि – जुबेर शेख
वरोरा – शिवाजी जयंती के मौके पर “छत्रपति शिवाजी महाराज का सर्वधर्म समभाव और न्याय राजनीति” इस विषय पर जहाँ जाहिर सभा का आयोजन किया गया था, वही 12 समाज हित मे तमाम उम्र काम करनेवाले 12 मान्यवरों का जाहिर सत्कार किया गया!
कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यप्रवक्ता प्रा. जावेद पाशा ने की और बतौर मुख्य अतिथि मा. रमेश राजुरकर और मा. अशोक तुमडाम (अध्यक्ष जागर संस्था, चंद्रपूर) उपस्तिथ थे! मान्यवरों में विदर्भ महिला संघटिका तायरा शेख, प्रा. नदीम सरफराज (यवतमाळ संपर्क प्रमुख, एमआईएम), अशरफ खान।साहब (चंद्रपुर जिला महासचिव, एमआईएम), शाबान भाई शेख साहब (वरोरा) मंचपर उपस्तिथ थे!
एमआईएम द्वारा उम्रभर विशेष कार्य के लिए जीवन समर्पित नकरनेवाले उपप्राचार्य (माजी), लोया कनिष्ठ महाविद्यालय, वरोरा के प्रकाश गांधी सर, डॉ. प्रभाकर पिम्पळकर, मा. ग.म. शेख गुरुजी, मा. लक्ष्मणजी गमे, मा. रफीक रंगरेज, माननीय शाहिस्ता खान पठान (भद्रावती), मा.भाऊराव निरंजने , सोनुताई येवले, बोपापुर सरपंच ज्योत्स्ना मेश्राम, गणेश गोहने(बोपापुर ग्रामपंचायत सदस्य), मा. धीरज लाकडे इनसबका सन्मानचिन्ह, शॉल और गुलदस्ता देकर जाहिर सत्कार किया गया!
अपने मार्गदर्शन में मुख्य अतिथि रमेश राजुरकर साहब ने कहा कि शिवाजी महाराज के नाम धार्मिक द्वेष की राजनीति करनेवालों को ये कार्यक्रम एक समन्वयवादी और समतावादी जवाब है! छत्रपति शिवाजी महाराज का स्वराज्य सभी धर्मों, व्यक्तियों और संस्कृतियों के लिए आदर का स्थान था! हिन्दू-मुस्लिम और अन्य सभी को इसीलिए यह स्वराज्य अपना लगता था! लेकिन आज कुछ धर्मान्ध ताकतें शिवाजी महाराज के नाम धर्मद्वेष सिखाती है, और इसके लिए झूठे इतिहास का सहारा लेती है! ऐसे कार्यक्रमों से लोगों तक सही जानकारी जाती है!
अध्यक्ष प्रा.जावेद पाशा सर ने शिवाजी महाराज के अनेकों ऐतिहासिक सन्दर्भो के साथ इस सच्चाई को रखा कि जो संघर्ष था वह राजनैतिक था! जहां शिवाजी महाराज ने संत तुकाराम को अपना आध्यत्मिक गुरु माना था, वहीं उन्होंने कोलसी के सूफी संत याकूत बाबा को भी अपने गुरु स्थान पे माना था! ये सर्वधर्म समन्वयवादी वारसा शिवाजी महाराज को उनके दादा और उनकी परंपराओं से मिला था! मालोजी भोसले जो कि शिवाजी महाराज के दादा थे, सूफी संत शरीफजी-शाहजी के अन्योन्य भक्त थे! कहते है, जब उन्हें दो पुत्र हुए तो उन्होंने दोनों पुत्रों के नाम इन्ही सूफी पीर के नाम पर रखें! एक पुत्र का नाम शरीफजी और दूसरे पुत्र का नाम शाहजी रखा, और शाहजी के पुत्र छत्रपति शिवाजी महाराज! शिवाजी महाराज के मुख्य सचिव, परराष्ट्र मंत्री मौलाना हैदर थे, उनका जीवित चित्र मुस्लिम चित्रकार मीर महंमद ने निकाला और उनकी फौज में बड़े महत्वपूर्ण ओहदो के साथ 38 टका मुस्लिम फौज में थे!
अशोक तुमडाम साहब ने शिवाजी महाराज के नाम दंगो और धार्मिक द्वेष की राजनिती करनेवालों को जमकर लताड़ा!
कार्यक्रम में महिलाओं और युवाओं की बड़ी तादाद में उपस्तिथि उल्लेखनीय रही!
कार्यक्रम के आयोजन में एमआईएम वरोरा तालुका और शहर कार्यकारिणी के मुज्जम्मिल शेख,जुबैर शेख, मोहसिन सय्यद, शहनाज शेख, शाइन शेख, अकीला शेख, मोहसिन शेख, शाफि शेख, नाहिद शेख, सायरा शेख, रत्ना पाटिल, रूबिना पठाण, मलिका पठाण, नसीम पठाण, जुबैदा पठाण, मुमताज अली, नगमा शेख, जैबुन शेख, रजिया रिज़वी, सूरज गोहने, लता बोडाले, शकीला शेख़ आदि ने मेहनत की!
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