*सावनेर में स्मशानभूमी के दहन स्थानकी दुर्दशा*
सावनेरः मानुष्य जीवनमे यदी कोई अंतिम सत्य है वह इस नश्वर जगतसे मुक्ती पाना जीसे हम निधन या स्वर्गवास भी कहते है.तथा स्वर्गवासके बाद मु्तकके पार्थीवपर परिजनोव्दारा अंतिम संस्कार कर दुखःद मनसे मु्तात्मा तथा उसके पार्थीव शरीरको अंतीम बीदाई दी जाती है.*
*जीसके लीये सुविधाये उपलब्ध कराना स्थानिक प्रशासन की जवाबदेही होती है.सावनेर नगर प्रशासन अपने ईस महत्वपूर्ण जवाबदेहीसे पल्ला झाडती नजर आरही है.*

*ऐसाही मामला शहरके मुख्य स्मशान घाट राम गणेश गडकरी स्मशानभूमी पर उजागर हो रहो रहा है.इस दहन घाटपर साफसफाई का आभाव तो है ही साथ ही जीन स्थानोपर अंतीम संस्कार कीये जाते है वहा के हालात ना पुछे तो ही काफी है.*

*अब तो हालात इतने बत्तर हो गये है की दहन स्थानोपर करीब ढाई तीन फीट गहरा गढ्ढा पड गया है.ऐसेमे एक पार्थिव शरीर के दहनमे जीतनी लकडीया लगती है उतनी तो यह गढ्ढाही लील लेता है.जीससे इस महंगीमे अंतीम संस्कार हेतू करीब बारा पंधरा मन लकडीया लेनेको शोकाकुल परिवार मजबूर है.इस अनास्था की शिकायत नगर प्रशासन तथा उक्त घाटके ठेकेदारको करणे पर भी उनके कानोपर जू तक नही रेंग रही.और और दहन स्थलका वह गढ्ढा और भी बडा होते जारहा है.जीस ओर शिध्रतासे ध्यान देना जरुरी है.क्योकी कीसीभी अंतीम संस्कारमे शहरके गणमान्योके साथ ही अन्य शहरोके लोग भी शामील होते है.और नगर प्रशासन के लचर कार्यप्रणाली को कोस दुखी मनसे अपने परिजनोका अंतीम संस्कार कर नगर प्रशासन की इस नागवारा कार्यप्रणाली कीरकीरी अनायस ही हो जाती है.*

*नगर पालीका सावनेर के प्रशासक तथा उपविभागीय अधिकारी अतुल म्हेत्रेसे नगरवासीयोको व्दारा मांग की जारही है की ईस विषयपर विशेष ध्यान देकर उक्त समस्याका शिध्रतासे निराकरण कर कमसे कम अंतिम संस्कार हेतू उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराये.*
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