*रेत माफिया, राजस्व विभाग, वन विभाग के अधिकारियों व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करें ; पत्रकार सुरेन्द्र नायक ने की मांग*
*न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तयारी*
सावनेर ः शून्य रॉयल्टी प्राप्त करते हुए घाट संचालक मध्यप्रदेश के सौसर निवासी संजय कामेश्वर झा ने जिला माइनिंग नागपुर को दिए गए शपथ पत्र की शर्तों का उल्लंघन कर अपने स्वार्थ के लिए महाराष्ट्र से आने वाले सैकड़ों वाहन स्वामियों को रेत व रॉयल्टी बेची है। उन्होंने इस रेत को पांढुर्ना रोड पर खुरसापार चेक पोस्ट व छिंदवाड़ा रोड पर सतनूर चेक पोस्ट पर नियमानुसार निरीक्षण प्रक्रिया पूरी किए बिना कवठा के पांधन रोड से परिवहन कर सरकारी राजस्व का गबन करने का राष्ट्रीय पाप किया जा रहा है।
पत्रकार सुरेन्द्र नायक ने मांग की है कि रेत माफिया, राजस्व विभाग, वन विभाग के अधिकारियों व इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। ऐसा न होने पर उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की इच्छा जताई है।
*रेत माफिया द्वारा सरकारी राजस्व की लूट का मामला*

सुरेन्द्र नायक ने पुलिस थाना केलवद में दर्ज शिकायत में बताया है कि महाराष्ट्र के नागपुर जिले में वितरित रेत तथा उससे होने वाले अंधे मुनाफे में मध्यप्रदेश प्रशासन की आपत्तियों के कारण सौंसर के रेत माफिया ने इस क्षेत्र के कुछ नेताओं के नेतृत्व में राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर मध्यप्रदेश से रेत को नागपुर जिले में लाने की चतुराईपूर्ण योजना बनाई, जिसके तहत नागपुर जिले में 10,000 ब्रास रेत पर 0 (शून्य) रॉयल्टी ली गई, जिसके लिए 5 महीने की अवधि रखी गई। इस प्रक्रिया के दौरान नागपुर जिले के खनन अधिकारियों ने कुछ नियम कड़े कर उन्हें यह शून्य रॉयल्टी प्रदान की।

जिसमें शर्त थी कि पांडुर्ना रोड पर खुरसापार और छिंदवाड़ा रोड पर सातनूर चेक पोस्ट पर निरीक्षण प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही रेत का परिवहन किया जाए, इन दोनों मार्गों का उपयोग करने के बजाय, यह परिवहन कवठा पांधन रोड के माध्यम से किया गया था। इसके पीछे कारण यह है कि इस मार्ग का उपयोग करने से यातायात पुलिस और आरटीओ विभाग से बिना रॉयल्टी चुकाए बच सकता है। यातायात के शून्य रॉयल्टी पक्ष प्राप्त करते समय, आवेदक ने नागपुर जिला प्रशासन को 10-12 वाहनों (ट्रकों) के नंबर दिए थे। नियमानुसार, यहां से रेत का परिवहन केवल उन वाहनों द्वारा किया जाना चाहिए था, लेकिन मध्य प्रदेश के रेत माफिया ने अपने फायदे के लिए महाराष्ट्र से आने वाले सैकड़ों वाहन मालिकों को पालू और रॉयल्टी बेच दी है। इतना ही नहीं, जीरो रॉयल्टी प्राप्त करते हुए चाट के संचालक मध्यप्रदेश के सौंसर निवासी संजय कामेश्वर झा ने जिला माइनिंग नागपुर को एक शपथ पत्र दिया था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वे जीरो रॉयल्टी रेत का परिवहन केवल निम्नलिखित वाहनों से ही करेंगे, इसके अलावा यदि किसी अन्य वाहन से रेत का परिवहन किया जाता है तो कानूनी कार्रवाई की बात होगी। मध्यप्रदेश के रेत माफिया ने नागपुर जिला प्रशासन के नियमों का उल्लंघन करते हुए उन वाहन मालिकों को इस घाट से रेत परिवहन की अनुमति दे दी है, जिन्हें रेत का परिवहन करने की अनुमति नहीं है। वाहन मालिकों ने जीरो रॉयल्टी दर पर रेत प्राप्त कर उसे खुले बाजार में बेच दिया है और करोड़ों रुपए का गबन किया जारहा है। यह रेत केवल एक निश्चित स्थान पर ही जानी चाहिए थी। वन विभाग ने मध्यप्रदेश से केलवद आने वाले कवठा पंधान मार्ग से किसी भी प्रकार के भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। तीन वर्ष पूर्व जब इसी मार्ग से रेत का परिवहन किया जा रहा था, तब वन विभाग खापा ने केलवद थाने में रेत परिवहन करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस सड़क पर बैरिकेड्स लगाने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को रेत और अन्य कच्चे माल के परिवहन से अच्छी खासी आय हो रही थी, इसलिए उन्होंने इस मार्ग को फिर से खोल दिया।

महाराष्ट्र रेती घाट संचालक को शून्य रॉयल्टी मिल रही थी, जबकि भू-टोही क्षेत्र गूगल मैप पर कहीं और दिखाया गया था। उस आधार पर अनुमति मिलने के बाद पूर्व नियोजित तरीके से राजस्व अधिकारियों को पत्र लिखकर भू-कंपन क्षेत्र को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग की गई। और अधिकारी ने बिना किसी जांच के पाया कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर घने जंगल में पुणे की कंपनी शौर्य टेक महाराष्ट्र में खनिज वाहनों का परिवहन कर रही है। आवाजाही पर नजर रखती है। हालांकि उनका प्रतिनिधि हमेशा नागपुर में जिला खनिज अधिकारी के कार्यालय में मौजूद रहता है, लेकिन इतनी धोखाधड़ी के बाद भी उन्हें इस धोखाधड़ी का पता नहीं चलना संदेह पैदा करता है। शिकायतकर्ता को आरटीआई के जरिए जानकारी मिली कि वन विभाग कवठा केलवद पंधान मार्ग पर किसी भी तरह के यातायात की अनुमति नहीं देता है। साथ ही कुछ वर्ष पूर्व वन विभाग ने केलवद पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कवाठा-केलवद पांधन मार्ग पर खनिज यातायात के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। अतः इस मामले की गहन जांच कर संबंधित रेत माफिया, राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए तथा मेरे क्षेत्र के बालू घाटों से निकाली गई रेत और उस कार्य में शामिल वाहनों को संरक्षित किया जाए तथा उन वाहन मालिकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए साथ ही इसमें शामिल आरोपियों के मोबाइल फोन की सीडीआर निकाली जाए तथा अन्य लोगों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। इसकी प्रतिलिपि माननीय देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री महाराष्ट्र, हर्ष पोद्दार पुलिस अधीक्षक नागपुर ग्रामीण, अनिल म्हस्के उपविभागीय पुलिस अधिकारी सावनेर को दी गई है।
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