*गिलोय वनस्पती वितरित करते*
*मुलाखत एक योग शिक्षक व योग साधक की*
विशेष प्रतिनिधि- सुरेखा नवघरे
*नागपूर: डॉ नंदिता साहू केंद्र सरकार कर्मचारी , भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण , नागपुर में हिंदी अनुवादक पद पर कार्यरत नागपुर शहर की एक जानी मानी हस्ती मे शुमार लेखिका और कवयित्री है । जिन्होने उनके जिवन मे योग और आयुर्वेद से आये परिवर्तन के बारे मे खुलकर विचार रखे जिसमे की योग और प्राणायाम, और गिलोय “अमु्ता” के संदर्भ मे बताते हुये अपने अनुभव साझा कीये. उन्होने बताया की मुझे जीवन मे बोहोत सारी शारीरिक तखलिफ थी मेरा अँक्सीडंट होने के कारण मेरे हाथो मे बोहोत चोट आई थी जिसके कारण मै अपना एक हाथ बिलकुल उपर नहीं उठा पाती थी और थायरॉईड होने के कारण वजन भी बोहोत बड चुका था*

*तब मुझे आदर्श योग शिक्षिका सौ. सुरेखा नवघरे मिली मै उनके साथ योग करणे लगी और कुछ ही दिनो मे मेरे पुरे शरीर मे बदलावं दिखने लगे मेरा हाथ भी ठीक हो गया और मेरा थॉयराइट भी नॉर्मल हो गया. आज मै क्या सुरेखा जी हमारे पुरे परिवार को योग सिखाती है*
*आज फीर हमारी मुलाखात हुयी और उन्होने हमारे यहा पहुचकर औषधीय गुणधर्म से भरपूर “गिलोय” जिसे अमृत बेला कहा जाता है जिसके फायदे इतने कि बताया भी नहीं जाता ऐसी गिलोय वनस्पती भेट कर गयी जो मैने आज आपने गार्डन मे लागाई है.कि हम घरके लोग प्रतिदिन इसका सेवन करके आपने रोगप्रतिकारक शक्ती बढाने और स्वास्थ अच्छा रखने के प्रयास करेंगे कोरोना तो क्या और कोई भी बिमारी हमे छू ना सके. मै सुरेखा जी को बोहोत धन्यवाद देती हू कि उनोने मुझे ये अमृत जैसी यांनी अमृत ही भेट कि इसे मै आपने पुरे परिवार को इसका सेवन करावाकर उन्हे भी स्वस्थ एंव तंदुरुस्त रखने का प्रयास करुगी ऐसा विश्वास दिलाते हुये सभी बहनो से अनुरोध कीया अपने व्यस्ततम जिवन मे कुछ पल अपने और अपने परिवार के सेहत के लीये अवश्य निकले ताकी गंभीर बिमारीयो के साथ साथ आम बिमारीयाँ भी तुम्हे छु न सके ऐसी विनंती इस अवसर पर की.*
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