*कंटेनमेंट जोन को लेकर वर्धा के व्यापारी आक्रोषित*
*मार्केट का अधिकतर परिसर सील, आवागमन के लिए तक नही छोडा मार्ग, व्यापार हुआ चौपट*
वर्धा प्रतिनिधि – पंकज रोकडे
वर्धा –शुक्रवार व शनिवार को शहर के कुछ व्यापारी तथा नोकर कोरोना संक्रमित निकलने से प्रशासन ने मार्केट का अधिकतर एरिया ही सील कर दिया. परिणामवश पूरा व्यापार चौपट होकर असुविधा होने से कंटेनमेंट जोन को लेकर व्यापारी आक्रोषित हो गए. व्यापारियों ने प्रशासन के इस नीति का जोर-शोर से विरोध करना आरंभ किया है. जिससे व्यापारी व प्रशासन पून: एकबार आमने-सामने आने की संभावना है.
उल्लेखनीय है कि, मार्केट परिसर में कुछ व्यापारी व कार्यरत नौकर पॉजिटिव पाए गए. जिससे प्रशासन ने हरकत में आते हुए पत्रावली लाइन चौक से दत्त मंदिर, सब्जी मार्केट से कपडा लाइन तथा मेन सोशालिस्ट चौक से इंगोले चौक का परिसर कंटेनमेंट जोन घोषित कर सील कर दिया. परंतु वास्तविक रुप में व्यापारी व नोकरों का घर मार्केट परिसर में है ही नही. वही दूसरी ओर जहां मरीज मिले उसके आगे की लाइन ही खुली है. जहा मरीज नही वह लाइन कंटेनमेंट जोन बनाई गई है. जिससे मार्केट के लगभग सभी दूकान बंद रहने से व्यापारियों में रोष व्याप्त है. ज्ञात रहे कि, लॉकडाऊन के चलते पहले ही व्यापार डूब गया है. किसी तरह दूकानें शुरु हुई, परंतु उसमें भी अनेक निर्बंध लगाए गए. उसके बाद अब व्यापारी व नोकर कोरोना संक्रमित मिलने से प्रशासन ने फिर व्यापारियों को टार्गेट करना शुरु किया है. जैसे कि, व्यापारी तथा नोकर मार्केट परिसर में नही बल्कि शहर के अन्य हिस्सों में रहते है. जिस कारण उनका निवासी परिसर सील करना आवश्यक है. परंतु प्रशासन ने उनका निवासी परिसर छोड मार्केट का अधिकतर हिस्सा ही सील करने से व्यापार पूरी तरह से चौपट हो गया है. व्यापारियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड रहा है.
इस ओर प्रशासन को ध्यान देकर उचित उपाययोजना करने की मांग की जा रही है.अन्य मार्गो पर बढी यातायात प्रशासन ने मार्केट परिसर कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है. जिससे आवागमन तक बंद हो गया है. मात्र सराफ लाइन, पत्रावली लाइन शुरु है. जिससे अब आवागमन इन्ही मार्गो से होने के कारण वहा वाहनों की भीड बढ गई है. परिणामवश यातायात अवरुद्ध होने की समस्या निर्माण हो गई है.
प्रशासन की दोहरी नीति
कंटेनमेंट जोन को लेकर प्रशासन ने दोहरी नीति अपनाने का आरोप व्यापारियों ने किया है. व्यापारी मिलन गांधी, बंटी व्यास, रोषण कठाले, मोहन चितलांगे व अन्य व्यापारियों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि, जिस लाइन में पॉजिटिव मिले वह लाइन खुली है. कपडा लाइन के व्यापारी तथा नोकर अन्य जगह रहते है. जिनके घर में मरीज मिले वह घुम रहे है. नोकरों के साथ काम करनेवाले अन्य नोकर भी शहर में घुम रहे. फिर व्यापारियों के साथ ही यह अन्याय क्यो?एसडीओ के आदेश में भी विसंगति है.आदेश में प्रशासन ने मार्केट में कोरोना बाधित मिलने की बात कही.किन्तु एक भी व्यक्ति यहां का मूल रूप से निवासी नही है.यहां केवल व्यापार करते है,उनका निवास अन्य जगह है.
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