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*श्वान की हत्या कर शव को जलाया ; खापरखेडा की घटना*

*श्वान की हत्या कर शव को जलाया ; खापरखेडा की घटना*


नागपुर उपजिल्हा प्रतिनिधी दिलीप येवले

नागपुर:- सडक के पशुओ को भी इंसानो जैसे संविधानिक अधिकार हैं, परंतु प्रशासन-सरकार के द्वारा बेजुबान पशुओ के हित मे सख्त कदम ना उठाने के कारण लोग सडक के पशुओ को प्रताडीत कर रहे हैं। बेजुबान पशुओ को भी कानुनी संरक्षण प्राप्त हैं मगर प्रशासन-नागरिक-ग्रामपंचायत-नगरपरीषद आज भी पशुक्रूरता निवारण अधिनियम, जीव जंतू कल्याण बोर्ड के दिशानिर्देशो से अवगत नही हैं इसलीये रोजाना सडक के पशुओ पर अत्याचार हो रहा हैं। बेजुबान पशुओ के मौलिक अधिकारो का हनन हो रहा हैं यह पशुओ का दुर्भाग्य हैं परिणामतः पशुक्रूरता की घटनाओ को बढावा मिल रहा हैं।
ऐसी ही एक पशुक्रूरता की घटना खापरखेडा के वार्ड क्र. 4 के पास हुई। खापरखेडा परिसर मे पशुपक्षीहितार्थ कार्य करने वाले सर्पमित्र दद्दु गणवीर इनको जाणकारी मिली की वार्ड न 4 परिसर मे एक श्वान को जलाकर रस्सी से बांधकर नाली मे फेका गया हैं यह जाणकारी मिलते ही दद्दु गणवीर रात को घटनास्थल पहुचे और इस अमानवीय घटना को अंजाम देणे वाले व्यक्ती पर कानूनन कार्यवाही होनी चाहीये इसलीये खापरखेडा पुलीस स्टेशन पहुचकर घटना के बारे मे बताया मगर देर रात तक पुलीस विभाग ने कोई कार्यवाही नही की।
इस पशुक्रूरता के घटना की पुरी जाणकारी व्हीडिओ के साथ सोशल मिडियापर पर प्रसारित की तो पशुप्रेमी आशिष कोहळे (people for animals unit-2 org.), स्वप्नील बोधाने (पशुकल्याण अधिकारी महा. राज्य), राजेशजी दोशी (R.A.D बहुउद्देशीय संस्था) अपने टीम के साथ घटनास्थल पहुचे। इस घटना पर पुलीस विभागद्वारा तुरंत कार्यवाही होनी चाहीये इसलीये खापरखेडा पुलीस स्टेशन के पुलीस निरीक्षक भटकर साहब से चर्चा कर विषय का गांभिर्य बताया तो तुरंत पुलीस विभाग ने घटनास्थल पहुचकर पंचनामा किया और अज्ञात व्यक्ती के नाम पर पशुक्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं IPC 429 के तहत FIR दर्ज की गयी। इस मामले मे आगे की कार्यवाही करने हेतू आरोपी की तलाश पुलीस विभाग कर रही हैं।

*पशुक्रूरता के ऐसे कृत्यो पर पुलीस विभाग कानुनन कार्यवाही कर सकती है*

सडक के स्वस्थ श्वानो को पकडने हेतू म.न.पा, जिल्हा परिषद, ग्रामपंचायत को शिकायत देना दबाव डालना, अपने पालतू पशुओ किसीं भी कारणवश जानबुझकर सडक पर छोड देना, उनका ध्यान ना रखना, पशुओ पर गर्म पाणी डालना, पालतू जानवरो को खाना-पाणी-उचित जगह -वक्त पर इलाज मुहैया ना करवाना, गाय-बैल अन्य पशुओ पर क्षमता से अधिक बोझ लादना, किसीं जंगली जीव को पकडणे-आकर्षीत करने के लिये पालतू पशु का उपयोग करना, जखमी-बिमार पशुओ से काम करवाना, सडक के श्वानो एवं अन्य पशुओ को लाठी-पथरो से मारना-चोट पहुचाना, जहर देना, हत्या करना, उन्हे उनकी जगह से भगाना, वाहनो से पशुओ को कुचल देना-जखमी करना, पशुओ को छोटे -बडे वाहनो-रिक्षा मे क्रूरता से भरकर परिवहन करना, पशुपक्षीयो का लढाई हेतू वापर करना, सडक के श्वानो को सोसायटी के श्वान, कॉलोनी के श्वान दुसरी जगह स्थलांतरीत करना यह पशुक्रूरता के श्रेणी मे आता हैं इस क्रूर कृत्य हेतू जेल भी जाना पड सकता हैं। पशुओ को भी संविधानिक एवं कानूनन अधिकार प्राप्त हैं इसलीये पशुक्रूरता की घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ती पर पशुक्रूरता अधिनियम एवं भारतीय दंड संहिता 428, 429, महाराष्ट्र प्राणी संरक्षण कानून या अन्य कानून नुसार पुलीस विभाग कार्यवाही कर सकता हैं।

पशुक्रूरता के मामलो मे पुलीस ने तुरंत कार्यवाही करनी चाहीये, पशुप्रेमियो को पुरा सहयोग करना चाहीये। पशुक्रूरता विषय मे संबधित सभी विभागो ने पशुहितार्थ जनजागृती करनी चाहीये। सडक के श्वानो को पकडकर दुसरी जगह स्थलांतरित करना कानूनन जुर्म हैं। गावो मे श्वानो की संख्या पर नियंत्रण हेतू ग्रामपंचायत, नगरपरिषद ने जीव जंतुकल्याण बोर्ड एवं ABC रुल 2001नुसार सडक के श्वानो की नसबंदी करवानी चाहीये। जख्मी-बिमार श्वान, बिल्ली, मवेशीयो के तुरंत इलाज हेतू पशुनिवारा केंद्र स्थापित करणे चाहीये।
स्वप्नील बोधाने (पशुकल्याण अधिकारी महा.राज्य)*

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