*राज्य में पहली बार नरखेड काटोल तहसीलों में ड्रोन से गिराये गये सीड बाॅल*
कोंढाली संवाददाता- दुुुर्गाप्रसाद पाांडे
काटोल – राज्य में वन क्षेत्र बाढ़ाने के लिये एक अभिनव दृष्टिकोण में नागपुर वन विभाग द्वारा नागपुर जिले के मध्य प्रदेश तथा महाराष्ट्र के आंतरराज्यीय सीमां से सटे नरखेड तथा काटोल तहसील में काटोल उपविभागीय वनपरिक्षेत्र में हवाई वनीकरण तकनिकी के माध्यम से पहाडी क्षेत्र में बीज गेदों को गिराया गया।
राज्य में बीज गेदों की हवाई वनीकरण के लिये ड्रोन से गिराये जाने यह पहला ही प्रयोग बताया जाता है ।
*महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश सीमा पर दुर्गम क्षैत्र मे 50 हेक्टेयर में 1 लाख 50 हजार सीडबॉल गिराये गए*
*महाराष्ट्र में पहला पायलट प्रोजेक्ट*
नरखेड़ वन परिक्षेत्र में राज्य में पहली बार वन विभाग ने महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश सीमा पर दुर्गम पहाडी क्षेत्रों में खैर, नीम, सागौन, आंवला, अमरप्राश, सीताफल, बिहाड़ा, आम आदी पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों के 1.5 लाख पौधे के सिडबॉल ड्रोन व्दारा नरखेड वनपरिक्षैत्र के 50 हेक्टर क्षैत्र मे डाले गये. वन विभाग व्दारा राज्य मे पहली बार ड्रोन की मदत से वृक्षारोपन का यह पायलट प्रोजेक्ट है . प्रोजेक्ट की सफलता के बाद वन विभाग पूरे राज्य में दूर-दराज के इलाकों में ड्रोन से सिडबॉल डालकर वृक्षारोपन करेगा.
कोंढाली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी फरीद आजमी ने पिछले तीन वर्षों में कोंढाली वन परिक्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है जिससे जंगल तथा वन्यप्राणीयों का संवर्धन हुआ है तथा कोंढाली क्षेत्र के जंगल मे वन एवं वन्य प्राणीयों की संख्या बढी है . कोंढाली वन परिक्षेत्र अधिकारी फरीद आजमी को नरखेड़ वन परिक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वन विभाग ने नरखेड वनपरिक्षैत्र मे वृक्षारोपन करने का निर्णय लिया पर महाराष्ट्र -मध्यप्रदेश सिमा पर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र है. वन विभाग इस क्षेत्र में पेड़ लगाना चाहता था. मजदुरों व्दारा वृक्षारोपण मे खर्च अधिक होने के कारण वन विभाग ने ड्रोन की मदद से राज्य में पहली बार पेड़ लगाने का फैसला वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मुख्य वन संरक्षक कल्याणकुमार,उपवन संरक्षक नागपुर बी एस हाडा,सहय्यक वनसंरक्षक प्रज्योत पालवे किया. ड्रोन की मदत से हवाई पेड़ लगाने में कई तकनिकी कठिणाया थी इस मिशन की जिम्मेदारी कोंढाली के वनपरिक्षैत्र अधिकारी फरीद आजमी को दी गयी .फरीद आझमी मिशन के लिए पिछले तीन महीने से लगातार प्रयास कर रहे है .वन परिक्षैत्र अधिकारी फरीद आजमी ने सबसे पहले उस क्षेत्र के जंगल के सभी पेड़ों का सर्वेक्षण वन अधिकारी कर्मचारी तथा उपग्रहों की मदद से किया तथा वरिष्ठ अधिकारीयों से चर्चा कर खैर,निम,आवला,बिहाडा,सिताफल,अमलप्राश आदी स्थानीय प्रजाती के पेड लगाने का निर्णय लिया गया .कोंढाली से 3 किमी की दूरी पर वन विभाग की चमेली नर्सरी में खैर, नीम, आंवला, सागौन, अमरप्राश, बिहाड़ा आदि के पेडो के बीज सीडबॉल निर्माण का काम शुरु हुआ .मिट्टी तथा खाद का उपयोग कर सिडबॉल बनाने की विशेष तकनिक जानकारी के लिये वनपरिक्षैत्र अधिकारी फरीद आझमी ने वनविभाग की चिखलदरा तथा परतवाडा नर्सरी मे जाकर ड्रोन से डालने के लिये सिडबॉल बनाने की तकनिक की जानकारी ली.वृक्षारोपन के लिये ड्रोन के उपयोग के लिये वनविभाग ने ई ट्रेडर निकाला जिसमे गुजरात की एक कंपनी के ड्रोन की मदद से सीडबॉल लगाने का काम दिया गया. ड्रोन की एक बार में 10 किलो सीडबॉल लेकर उडने की क्षमता है. ड्रोन ने 1 जुलाई से 15 जुलाई तक रोजाना लगभग 20,000 सीडबॉल एयर ड्रॉप किये लगभग 15 दिन मे महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित नरखेड़ वनपरिक्षैत्र के दुर्गम पहाडी नरखेड उपवन तथा नरखेड बिट मे 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 1 लाख 50 हजार सिडबॉल डाले गये.राज्य मे पहली बार नरखेड़ वन परिक्षैत्र में ड्रोन व्दारा सिडबॉल डालकर वृक्षारोपण अभियान चलाया गया.इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ड्रोन व्दारा सिडबॉल डालकर वृक्षारोपण का अभियान वन विभाग राज्य में करेगा.
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