*वन्यप्राणियों के लिये जल संग्रहण (जलस्रोतों के निर्माण की मांग!*

*बस्तियों में पहूंच रहे वन्यप्राणि*
कोंढाली संवाददाता – दुर्गाप्रसाद पांडे
नागपुर – वन विभाग के कोंढाली,कलमेश्वर,हिंगणा, नरखेड तथा वर्धा वन विभाग के कारंजा-सेलू वन परिक्षेत्र में तेंदुआ,बाघ, भालू, चितल, सांभर,हिरण,बंदर,रोही(नील गाय),मोर,आदी वन्यप्राणियों का बसेरा है। कोंढाली वनपरिक्षेत्र में अब वन्य प्राणी पानी की तलाश में आबादी वाले इलाकों पहुंच रहे हैं। वन्य जीवों की प्यास बुझाने वन विभाग के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। पानी की तलाश में वन्य जीव ग्रामीण आबादी में आ जाते हैं। ऐसे में वे कुत्तों तथा किसानों एवं गोवंश पालकों के पशुओं का शिकार बना जाते हैं, या फिर सडक़ दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं। वन परिक्षेत्र कोंढाली के अंतर्गत पिछले दो माह माह में अलग-अलग हादसों में करीब चार से छह किसानों के पशुओं को अपना निवाला बनाया है। वहीँ अनेक किसानों की फसलो को चट कर कर रहें है। वहीं विगत तिन वर्षों में अनेक वन्य प्राणियों की सडकों को पार करतें समय तिन चार वन्य प्राणी सडक पार करते घायल हुए है तथा दुर्घटना में मारे गये है । गर्मी में इन क्षेत्रों में पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
कोंढाली सघन वन क्षेत्रों में है, यहाँ वन्यप्राणियों के लिये पानी के पुख्ता इंतजाम होना जरूरी है, पुख्ता इंतजाम के आभाव के चलते – पानी की तलाश में भटकर आवासीय बस्ती तथा समिपस्थ खेतो में बने गो शाला में बंधे या चरते समय गाय- भैंस के साथ साथ को कुत्तों को भी अपना निवाला बना रहे है। यह जानकारी नागपुर जिला परिषद के सदस्य सलील देशमुख तथा पुर्व जि प सदस्य रामदास मरकाम पं स सदस्य संजय डांगोरे ने है।

जि प सदस्य सलील देशमुख ने बताया की इस वन क्षेत्र में अप्रैल और मई माह के आसपास पानी के स्रोत सूख जाते हैं। पानी की तलाश में वन्य प्राणी वनों से सटे गांवों में पहुंच जाते हैं, जल स्रोत सूखने पर वन विभाग को वन्य जीवों के लिए पानी के इंतजाम करना चाहिए।कोंढाली वन परिक्षेत्र के उपवनक्षेत्रों में पानी की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कुछ जल स्रोतों के लिये गड्डे खुदवाए तो जरूर, लेकिन सिर्फ एक या दो में ही थोड़ा पानी था वह भी मार्च अप्रैल में सुखने जानकारी मिली है । यहां के वन्यप्राणियों के पेयजल के स्रोतों के लिये मेटपांजरा जि प सदस्य सलील देशमुख तथा कोंढाली क्षेत्र के पुर्व जिला परिषद सदस्य रामदास मरकाम तथा बिहालगोंदी की सरपंच मरकाम ने वन विभाग को पत्र लिखा है। साथ ही कोंढाली के सामाजिक कार्यकर्ता ब्रजेश तिवारी, राजेन्द्र खामकर,दुर्गाप्रसाद पांडे इसके लिये वरिष्ठ वन अधिकारीयों तथा जनप्रतिनिधियों से मिलकर उन्होंने चमाली सहीत सभी छह उपवनों के जंगल में सूखते जलस्रोतों के कारण हिरण, चीतल,सांभर,मोर,तेंदुआ,बाघों नीलगाय के लिये वन विभाग से पीने के पानी की वैकल्पिक करने की मांग की जायेगी।
इस विषय पर काटोल उपविभागीय वन अधिकारी प्रज्योत पालवे से पुंछने पर बताया की वनों में जहां पानी स्रोत है वहां वन्यप्राणियों के पीने के पानी की व्यवस्था की जायेगी, कोंढाली वनपरिक्षेत्र मे वन्यप्राणियों के लिये पीने के पानी के स्रोत बनाने की मांग की है। इस के लिये (बिहालगोंदी -कुंडी) क्षेत्र में जलस्रोतों का निरिक्षण भी किया गया है। इस का नियोजन कर जलस्रोतों के निर्माण के लिये निधी की मांग मंजूर होने पर निर्माण कार्य किया जा सकता है।
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